सर्व ब्राह्मण महासभा (पंजी.) – उदेश्य

  • देव वाणी संस्कृत के पठन-पाठन के प्रबन्ध से संस्कारो व संस्कृति की रक्षा करना तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रचार का यतन करना।
  • मेधवी छात्रो को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • ब्राह्मणो को नित्य कर्मकांड व संस्कारो के करने के लिए प्रशिक्षित करना तथा उपदेशको को प्रचारार्थ शिक्षा देना।
  • ब्राह्मणो को आर्थिक उन्नति के लिए कृषि, आयुर्त्वेदिक, ज्योतिष, व्यापार इत्यादि अर्थकारी परियोजनाओ के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
  • प्राचीन ऋषियों की धरोहर (धर्म, कला, सहित्य, सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, विज्ञान आदि) को सुरक्षित रखना व अप्रकाशित पुस्तकों को यथा संभव छपवाना।
  • ब्राह्मण विदवाओ और दीन अनाथों को आश्रयार्थ यथाशक्ति परिसर का प्रबन्ध करना एंव जाति में प्रचलित कुरीतियों और त्रुटियों को पूर्ण रुपेण दूर करने का यत्त्न करना।
  • विभिन प्रांतो, नगरो मैं महासभा की शाखाये, उपशाखाये स्थापित करके समाज का चहुमुंखी विकास करना। समाचार पत्रो, पत्रिकाओं द्वारा ब्राह्मणो की उन्नति के लिए प्रचार-प्रसार करना।
  • समस्त ब्राह्मणो में परस्पर पारिवारिक, सामाजिक एकता का भाव उत्तपन्न करना तथा उनकी आध्यात्मिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा आर्थिक उन्नति के लिए प्रयत्त्न करना।
  • ब्राह्मण समाज के हित में मासिक पत्रिका का प्रकाशन तथा स्थाई कोश एंव इसके मुद्रण यन्त्र का प्रबंध करना।
  • भारत के भिन्न भिन्न स्थानो पर हर वर्ष महासभा द्वारा अधिवेशन / कार्यशालाओं का आयोजन करना।
  • देश भर में अधिक से अधिक भगवान परशुराम के मंदिर बनवाने का प्रयत्त्न करना।
  • ब्राह्मणो को सशक्त्त एंव संगठित करना तथा एकता स्थापित करने के लिए प्रयत्त्न करना।
  • सरकारी एंव गेर सरकारी सेवाओं में ब्राह्मण बलकों को रोजगार दिलाने हेतु प्रयास करना।
  • ब्राह्मणो में स्वउद्योग (स्वंय का व्यापार) को भढावा देने का प्रचार-प्रसार करना।
  • प्राचीन एंव आधुनिक विधायों मेँ ज्ञान हेतु विश्वविधायों / विद्यापीठों तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानो की स्थापना करना।
  • ज्योतिष, आयुर्वेदिक एंव संस्कृति के ज्ञान हेतु प्रशिक्षण शिविर संचालित करना एंव उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान करना।
  • निर्धन ब्राह्मण परिवारों की चिकित्सा हेतु परशुराम आरोग्यशाला स्थापित करना।
  • व्रद्धों की सेवा हेतु व्रद्धाश्रम की स्थापना करना।
  • आध्यात्मिक क्षेत्रों से जुड़ें वक्ताओं, बुद्धिजीवियों, संथाओं को पुरस्कृत करना।
  • सामाजिक रूप से विकलांग जनों तथा महिलाओं के कल्याणार्थ विभिन्न कार्यक्रम चलाना।
  • पर्यावरण की रक्षा हेतु समाज मेँ जागरूकता पैदा करने के कार्यक्रम चलाना।
  • प्रक्रतिक आपदा मेँ प्राथमिक सुविधाये उपलब्द कराने का समुचित प्रबंध करना।
  • महासभा द्वारा पीतवर्ण के ध्वज में ‘फारसा’ का चिन्ह लगाकर ब्राह्मणो मेँ एकता का संदेश प्रसारित करना।
  • मानव मात्र के लिए आध्यात्मिक वातावरण के द्वारा सुखद सदाचार सम्पन्न समृद्ध विश्व व्यवस्था के निर्माण मेँ शतत साधना कर्म का अनुसंधान (आधायत्मिक, सामाजिक) कार्य विविध क्षेत्रों मेँ करना।
  • विश्व मानव के स्वस्थ्य जीवन मेँ गो गंगा तथा श्रीमद भागवद गीता का अपरिहार्य योग्यदान विष्यक विविध क्षेत्रों में शोध का संस्थानो की स्थापना करना।
  • अंतरराष्ट्रीय मानवीय भावनाओ का संरक्षण तथा संवर्धन करना।